आज फ़िर हमने एक सपना देखा,
हो जायेगा पूरा, वो अरमान है सोचा ।
खुश हो जाये दिल का हर एक कोना,
फ़िर आरजू की कलियो को खिलता देखा ॥
लाखो है चाहते जो रोज दम तोडती है,
फ़िर भी इच्छाएँ जीने को मचलती है ।
तेज हवाओ की आँधी मे पंख आजमाती है,
तूफ़ानो से दोस्ती कर अपना मकाम ढूँढती है ॥
मिल जायेगी मंजिल,है आँखॊ को यकीन,
तो क्या? गर है उल्झनो की गहराईयाँ अभी ।
दिल टूटा है, निराशा की चोट है बहुत गहरी,
है अजीब, दौड़ना सीखाती है,यही जीन्दगी रुकी रुकी ॥
मिली कई राहें हमें हमारी सोच के सफ़र पर,
कई ख्त्म हो गई अँधियारी हार के मो़ड़ पर ।
पर इन्ही राहों ने है,आगे बढ़ना सिखाया,
सफ़र पूरा होगा इनके बिना भी,ये यकीन है दिलाया ॥
आज हमने ये विश्वास फ़िर से जताया,
इसलिये आज फ़िर हमने एक सपना देखा ॥
Saturday, August 4, 2007
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